📖
विस्तृत उत्तर
पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ और पाँच कर्मेन्द्रियाँ जीव के लिए बनाई गई बताई गई हैं। उनका उद्देश्य शब्द, स्पर्श आदि को ग्रहण करना है। इनके साथ उभयात्मक मन भी जीव के लिए बनाया गया है। वर्णन में इन्द्रियों के नाम अलग-अलग नहीं गिनाए गए, पर पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ, पाँच कर्मेन्द्रियाँ और मन की भूमिका ग्रहण-प्रक्रिया से जोड़ी गई है।
📜
शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 3, PDF पृष्ठ 23, श्लोक 27
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?





