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विस्तृत उत्तर
अनासक्त जीव माया को इसलिए छोड़ देता है क्योंकि वह प्रकृति के भोगों को भोगकर उनकी असारता और क्षणभंगुरता समझ लेता है। वर्णन में बद्ध जीव प्रकृति का अनुसरण करता है, पर दूसरे प्रकार का अनासक्त जीव भोगों का अनुभव करके उस माया का परित्याग करता है। परमेश्वर से अधिष्ठित अजा प्रकृति अनन्त ब्रह्माण्डों की उत्पत्तिकर्त्री कही गई है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 3, PDF पृष्ठ 22, श्लोक 14
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