शिव तत्त्वशिव सगुण और निर्गुण कैसे हैं?विष्णु ने कहा कि महादेव ने अपने को सगुण और निर्गुण दो रूपों में विभाजित किया; निर्गुण अव्यक्त और सगुण महेश्वर रूप में हैं।#सगुण#निर्गुण#महेश्वर
शिव रूपअर्धनारीश्वर रूप क्या है?अर्धनारीश्वर रूप में शिव को अर्धनारी का शरीर धारण करने वाला, अव्यक्त और ग्यारह रूपों में परिवर्तित स्थाणु कहा गया है।#अर्धनारीश्वर#अव्यक्त#स्थाणु
सृष्टि तत्त्वछब्बीस तत्त्वों का वर्णन कैसे किया गया है?सोलह रूपों के साथ अव्यक्त, ध्याता जीव और ध्येय शिव आदि को लेकर छब्बीस रूप बताए गए हैं।#छब्बीस तत्त्व#अव्यक्त#जीव
लोकअव्यक्त अवस्था क्या होती है?अव्यक्त अवस्था में सृष्टि बीज रूप में रहती है, स्थूल रूप में नहीं।#अव्यक्त#सृष्टि#महाप्रलय
लोकसृष्टि शुरू होने से पहले क्या था?सृष्टि से पहले अव्यक्त शून्य, कारण-जल और विष्णु की योगनिद्रा अवस्था थी।#सृष्टि#महाप्रलय#अव्यक्त
लोकमहाप्रलय के बाद क्या बचता है?महाप्रलय के बाद कारण-जल, शेषनाग और विष्णु की योगनिद्रा अवस्था शेष रहती है।#महाप्रलय#क्षीरसागर#अव्यक्त
लोकदेवता अव्यक्त अस्त्र क्यों नहीं देख पाते?क्योंकि देवताओं की शक्ति भी परब्रह्म के अधीन और सीमित है।#देवता#केनोपनिषद#अव्यक्त
लोकअव्यक्त अस्त्र अदृश्य क्यों है?क्योंकि यह माया और रूप से परे अव्यक्त शक्ति है।#अदृश्य अस्त्र#अव्यक्त#देवदृष्टि
बीज मंत्र और देवता का स्वरूपबीज मंत्र देवता का 'कारण शरीर' क्यों कहलाता है?बीज मंत्र देवता का 'कारण शरीर' है — यह वह अव्यक्त बीज-रूप है जहाँ से देवता के सभी स्वरूपों का प्राकट्य होता है। साधक जप करके उनके किसी गुण से नहीं बल्कि उनकी मूल सत्ता (स्रोत) से सीधा संपर्क स्थापित करता है।#कारण शरीर#बीज शरीर#अव्यक्त