विस्तृत उत्तर
बीज मंत्र को देवता का कारण शरीर या बीज-शरीर कहा गया है। यह वह अवस्था है जहाँ देवता अपने मूल, अव्यक्त और बीज-रूप में स्थित होते हैं, जहाँ से उनके अन्य सभी स्वरूपों का प्राकट्य होता है।
इसी कारण जब कोई साधक किसी देवता के बीज मंत्र का जप करता है, तो वह केवल उनके किसी गुण या स्वरूप से नहीं, अपितु उनकी मूल सत्ता से, उनके स्रोत से सीधा संपर्क स्थापित करता है।





