विस्तृत उत्तर
बीज' शब्द का अर्थ अत्यंत गहरा है। जिस प्रकार एक छोटे से वट-बीज में एक विशाल वटवृक्ष अपनी सम्पूर्ण शाखाओं, पत्रों और फलों के साथ अव्यक्त रूप में समाया रहता है, ठीक उसी प्रकार एक एकाक्षर बीज मंत्र में उस मंत्र से संबंधित देवता का सम्पूर्ण स्वरूप, उनकी समस्त शक्तियाँ, गुण और चेतना निहित होती है।
बीज मंत्र उस देवता का संकेताक्षर है, उनकी ब्रह्मांडीय पहचान है।
तंत्र और आगम शास्त्र इस रहस्य को और भी स्पष्ट करते हैं। वे कहते हैं कि बीज मंत्र देवता का सूक्ष्म शरीर है।
इससे भी गहन स्तर पर, बीज मंत्र को देवता का कारण शरीर या बीज-शरीर कहा गया है। यह वह अवस्था है जहाँ देवता अपने मूल, अव्यक्त और बीज-रूप में स्थित होते हैं, जहाँ से उनके अन्य सभी स्वरूपों का प्राकट्य होता है।





