विस्तृत उत्तर
बीज मंत्र का वर्णन तंत्र शास्त्र और शक्ति संगम तंत्र में विस्तार से मिलता है:
'बीज मंत्र' का अर्थ
बीज' = बीज। जैसे एक छोटे बीज में विशाल वृक्ष की शक्ति होती है — उसी प्रकार बीज मंत्र में देवता की समस्त शक्ति संघनित होती है।
बीज मंत्र = एकाक्षरी/द्व्यक्षरी मंत्र
साधारणतः एक या दो अक्षरों का मंत्र। इनमें देवता का पूर्ण सार निहित है।
प्रमुख बीज मंत्र
| बीज | देवता | शक्ति |
|-----|-------|-------|
| ॐ | सर्वदेव/ब्रह्म | सर्वोच्च, आदि बीज |
| ह्रीं | माया/महालक्ष्मी | सृष्टि, माया शक्ति |
| श्रीं | लक्ष्मी | धन, समृद्धि |
| क्रीं | काली | परिवर्तन, शक्ति |
| ऐं | सरस्वती | ज्ञान, वाक् |
| दुं | दुर्गा | रक्षा, शक्ति |
| गं | गणेश | विघ्ननाश |
| हं | शिव | चेतना |
| क्लीं | कृष्ण/काम | आकर्षण |
बीज मंत्र और पूर्ण मंत्र
बीज मंत्र स्वयंपूर्ण है। इसे पूर्ण मंत्र में जोड़ा जाता है — तब मंत्र अधिक शक्तिशाली बनता है। उदाहरण: 'ॐ दुं दुर्गायै नमः' में 'दुं' बीज है।
