विस्तृत उत्तर
तंत्र और आगम शास्त्र इस रहस्य को स्पष्ट करते हैं। वे कहते हैं कि बीज मंत्र देवता का सूक्ष्म शरीर है।
जैसे हमारा यह स्थूल शरीर पंचभूतों से बना है, वैसे ही यह दृश्यमान जगत उस विराट ब्रह्म का स्थूल शरीर है। किन्तु उस स्थूल शरीर को चलाने वाली एक सूक्ष्म सत्ता होती है, जिसमें मन, बुद्धि, अहंकार और प्राण होते हैं।
ठीक इसी प्रकार, देवता का जो ऊर्जा-स्वरूप है, जो उनका चेतना-स्वरूप है, वही उनका सूक्ष्म शरीर है और बीज मंत्र उसी सूक्ष्म शरीर की साक्षात् अभिव्यक्ति है।





