विस्तृत उत्तर
हाँ, गरुड़ पुराण और वेदांत दर्शन दोनों के अनुसार मृत्यु के बाद सुख-दुख का अनुभव होता है — और यह अनुभव सूक्ष्म शरीर के माध्यम से होता है। स्थूल शरीर के नष्ट होने के बाद भी चेतना की संवेदनशीलता बनी रहती है।
गरुड़ पुराण में वर्णन है कि पापी जीव को यममार्ग पर भूख-प्यास, कोड़ों की मार और गर्म बालू पर चलने का कष्ट होता है। यमलोक में नरक की यातनाएँ होती हैं। ये सब दुख के अनुभव हैं जो सूक्ष्म शरीर से भोगे जाते हैं।
पुण्यात्मा को स्वर्ग में दिव्य आनंद, सुंदर वातावरण, गंधर्वों का संगीत और दिव्य भोजन का सुख मिलता है। यह सुख भी सूक्ष्म शरीर के माध्यम से अनुभव होता है।
गरुड़ पुराण में यह भी कहा गया है कि जीव को पिंडदान से भूख-प्यास की तृप्ति होती है और शक्ति मिलती है — यह भी एक प्रकार का अनुभव है जो मृत्यु के बाद होता है।
इस प्रकार मृत्यु केवल स्थूल शरीर का अंत है — आत्मा की चेतना और उसकी अनुभव-क्षमता मृत्यु के बाद भी बनी रहती है और कर्मों के अनुसार सुख या दुख का अनुभव होता है।





