कर्म सिद्धांतबुरे कर्म करने वाले सुखी क्यों रहते हैं, उत्तर क्या?बुरे कर्मी का सुख पूर्व जन्मों के पुण्य भंडार का फल है — यह अस्थायी है। बुरे कर्मों का फल विलंब से पर अवश्य आता है (कौरवों की तरह)। बाहरी सुख भीतरी शांति नहीं है। अंतिम न्याय अटल है।#बुरे कर्म#सुख#कर्मफल
लोकस्वर्ग में क्या-क्या सुख मिलते हैं?स्वर्ग में कल्पवृक्ष से हर इच्छा पूरी होती है, दिव्य झीलों से सिद्धियाँ मिलती हैं, गंधर्वों का संगीत गूंजता है और भूख-प्यास-बुढ़ापा नहीं होता।#स्वर्ग#सुख#कल्पवृक्ष
ग्रह मंत्रशुक्र गायत्री मंत्र का जप कैसे करें?'ॐ अश्वध्वजाय विद्महे...तन्नो शुक्रः प्रचोदयात्'। बीज: 'ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः' 16,000। शुक्रवार, श्वेत वस्त्र, हीरा/स्फटिक। शुक्र = सुख/सौंदर्य/दांपत्य। + लक्ष्मी पूजा।#शुक्र#गायत्री#सुख
लोकउत्तरकुरु वर्ष को भोगभूमि क्यों कहते हैं?उत्तरकुरु वर्ष निरंतर सुख और आनंद का क्षेत्र है जहाँ पूर्वजन्म के पुण्यों का भोग होता है। यहाँ भूदेवी भगवान वराह की पूजा करती हैं।#उत्तरकुरु वर्ष#भोगभूमि#सुख
लोकजनलोक में ब्रह्मानंद क्या होता है?जनलोक में ब्रह्मानंद भौतिक भोगों से रहित, ब्रह्म-चिंतन और आध्यात्मिक चेतना का आनंद है।#जनलोक#ब्रह्मानंद#सुख
फलश्रुति और लाभचन्द्रशेखराष्टकम् से गृहस्थ जीवन में क्या लाभ होता है?चन्द्रशेखराष्टकम् से घर में सुख, समृद्धि और स्थायी शांति आती है — चन्द्रमा माँ और घरेलू सुख का कारक है, इसलिए शिव कृपा से पारिवारिक संबंध शुद्ध और सौहार्दपूर्ण होते हैं।#गृहस्थ जीवन#पारिवारिक शांति#चन्द्रमा माता
जीवन एवं मृत्युक्या मृत्यु के बाद सुख-दुख का अनुभव होता है?हाँ, मृत्यु के बाद सूक्ष्म शरीर के माध्यम से सुख-दुख का अनुभव होता है। पापी को यममार्ग और नरक में यातनाएँ होती हैं, पुण्यात्मा को स्वर्ग में दिव्य आनंद मिलता है। पिंडदान से भूख-तृप्ति का अनुभव भी इसी का उदाहरण है।#मृत्यु के बाद#सुख#दुख