विस्तृत उत्तर
उत्तरकुरु वर्ष शृंगी पर्वत के पार उत्तर दिशा में स्थित है। शास्त्रों में उत्तरकुरु वर्ष को निरंतर सुख और आनंद का क्षेत्र (भोगभूमि) माना गया है। जम्बूद्वीप के अन्य आठ वर्षों की तरह यह भी एक भोगभूमि है जहाँ पूर्वजन्म के पुण्यों का भोग किया जाता है। यहाँ साक्षात् पृथ्वी देवी (भूदेवी) भगवान वराह की आराधना करती हैं जिन्होंने प्रलय के जल से पृथ्वी का उद्धार कर अपनी दाढ़ों पर उसे स्थापित किया था और हिरण्याक्ष का वध किया था। अन्य बाहरी द्वीपों और वर्षों में देव-समान और रोगमुक्त जीवन होने के बावजूद यहाँ के निवासियों को अपने पुण्य क्षीण होने पर पुनः कर्मानुसार अन्य योनियों या भारतवर्ष में जन्म लेना पड़ता है क्योंकि ये विशुद्ध कर्मभूमियाँ नहीं बल्कि केवल पूर्व पुण्यों को भोगने की भोगभूमियाँ हैं।
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