विश्वव्यापक शिवशिव इन्द्रियों के विषयों में कैसे हैं?शिव को शब्द, स्पर्श, रस और गंध स्वरूप कहा गया है; उन्हें गंधी और गणों का अधिपति भी नमस्कार किया गया है।#शब्द#स्पर्श#रस
श्रीमद्भागवतभागवत को वेदों का पका फल क्यों कहा गया है?शुकदेवजी भागवत को वेदरूपी कल्पवृक्ष का पका फल कहते हैं, जो उनके मुख से अमृतरस से परिपूर्ण हुआ है।#वेद#भागवत#शुकदेव
सृष्टि तत्त्वपृथ्वी में पाँच गुण क्यों बताए गए हैं?पृथ्वी शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध पाँचों गुणों से युक्त बताई गई है।#पृथ्वी#पाँच गुण#शब्द
सृष्टि तत्त्वपंच तन्मात्रा कैसे उत्पन्न होती हैं?अहंकार से शब्द, स्पर्श आदि तन्मात्राएँ उत्पन्न होती हैं और उनसे भूतसर्ग आगे बढ़ता है।#पंच तन्मात्रा#शब्द#स्पर्श
सृष्टि तत्त्वपंच तन्मात्रा कौन सी हैं?पंच तन्मात्रा शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध हैं।#पंच तन्मात्रा#शब्द#स्पर्श
लोकपाताल लोक में दिव्य औषधियों का क्या प्रभाव है?दिव्य औषधियाँ और रस पाताल निवासियों को रोग, बुढ़ापा, झुर्रियां, सफेद बाल, पसीना, दुर्गंध और थकान से मुक्त रखते हैं।#पाताल लोक#दिव्य औषधि#जड़ी बूटी
तंत्र विद्यातंत्र में पारद सिद्धि क्या होती है?पारद = शिव वीर्य (तंत्र)। पारद शिवलिंग (रसेश्वर), रस सिद्धि (भस्म/दीर्घायु), धातु परिवर्तन (alchemy)।: 'रसशास्त्र=तंत्र अंग'। पारद विषैला — सेवन खतरनाक।#पारद#सिद्धि#पारा