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रस से जुड़े सभी प्रश्न(7)

रस पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 7 प्रश्न उपलब्ध हैं।

विश्वव्यापक शिव

शिव इन्द्रियों के विषयों में कैसे हैं?

शिव को शब्द, स्पर्श, रस और गंध स्वरूप कहा गया है; उन्हें गंधी और गणों का अधिपति भी नमस्कार किया गया है।

#शब्द#स्पर्श#रस
श्रीमद्भागवत

भागवत को वेदों का पका फल क्यों कहा गया है?

शुकदेवजी भागवत को वेदरूपी कल्पवृक्ष का पका फल कहते हैं, जो उनके मुख से अमृतरस से परिपूर्ण हुआ है।

#वेद#भागवत#शुकदेव
सृष्टि तत्त्व

पृथ्वी में पाँच गुण क्यों बताए गए हैं?

पृथ्वी शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध पाँचों गुणों से युक्त बताई गई है।

#पृथ्वी#पाँच गुण#शब्द
सृष्टि तत्त्व

पंच तन्मात्रा कैसे उत्पन्न होती हैं?

अहंकार से शब्द, स्पर्श आदि तन्मात्राएँ उत्पन्न होती हैं और उनसे भूतसर्ग आगे बढ़ता है।

#पंच तन्मात्रा#शब्द#स्पर्श
सृष्टि तत्त्व

पंच तन्मात्रा कौन सी हैं?

पंच तन्मात्रा शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध हैं।

#पंच तन्मात्रा#शब्द#स्पर्श
लोक

पाताल लोक में दिव्य औषधियों का क्या प्रभाव है?

दिव्य औषधियाँ और रस पाताल निवासियों को रोग, बुढ़ापा, झुर्रियां, सफेद बाल, पसीना, दुर्गंध और थकान से मुक्त रखते हैं।

#पाताल लोक#दिव्य औषधि#जड़ी बूटी
तंत्र विद्या

तंत्र में पारद सिद्धि क्या होती है?

पारद = शिव वीर्य (तंत्र)। पारद शिवलिंग (रसेश्वर), रस सिद्धि (भस्म/दीर्घायु), धातु परिवर्तन (alchemy)।: 'रसशास्त्र=तंत्र अंग'। पारद विषैला — सेवन खतरनाक।

#पारद#सिद्धि#पारा
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