विस्तृत उत्तर
रावण राक्षसी प्रवृत्ति का प्रमुख उदाहरण इसलिए है क्योंकि राक्षस योनि में बुद्धि या तपस्या की कमी आवश्यक नहीं होती, परंतु करुणा, दया और सात्विकता का अभाव होता है। रावण चारों वेदों का ज्ञाता था और उसने घोर तपस्या की थी, परंतु उसमें घोर अहंकार, स्वार्थ, सत्ता-लालसा और पर-स्त्री हरण जैसी प्रवृत्तियाँ थीं। रामायण का दस-सिरों वाला मुख्य प्रतिनायक रावण, कुम्भकर्ण और ताड़का राक्षसों के प्रमुख उदाहरण बताए गए हैं। रावण का चरित्र दिखाता है कि ज्ञान और तपस्या अहंकार तथा भगवद्-द्वेष के साथ मिलकर राक्षसी प्रवृत्ति बन सकते हैं।
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