विस्तृत उत्तर
भृंगी प्रसंग से यह शिक्षा मिलती है कि ज्ञान या साधना के मार्ग पर अहंकार (भेद बुद्धि) और द्वैत स्वीकार्य नहीं है।
इस प्रसंग से यह भी स्पष्ट होता है कि परम तत्व में शिव और शक्ति दोनों की पूजा अनिवार्य है। शिव और शक्ति अभिन्न हैं और दोनों को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता।
जो साधक केवल एक को मानकर दूसरे को नकारता है, वह अपूर्ण साधना करता है।





