का सरल उत्तर
भृंगी प्रसंग से शिक्षा मिलती है कि साधना में अहंकार और भेद बुद्धि स्वीकार्य नहीं है और शिव-शक्ति दोनों की पूजा समान रूप से अनिवार्य है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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