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विस्तृत उत्तर
असुरों ने वासुकी का मुख अपने अहंकार के कारण पकड़ा। जब देवता और भगवान विष्णु वासुकी के मुख की ओर खड़े हुए, तो असुरों को लगा कि मुख वाला भाग श्रेष्ठ है और पूंछ पकड़ना अपमानजनक है। उन्होंने कहा कि वे शक्तिशाली और उच्च कुलों के हैं, इसलिए वे पूंछ नहीं पकड़ेंगे। भगवान विष्णु यही चाहते थे, क्योंकि वे जानते थे कि मंथन के समय वासुकी के मुख से विषैली ज्वाला और धुआं निकलेगा। असुरों ने गर्व में मुख पकड़ा और उसी का कष्ट झेला।
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