विस्तृत उत्तर
राक्षस योनि मनुष्य के कर्मों की अतिवादिता, घोर अहंकार और क्रूरता के कारण मिलती है। जो मनुष्य यह मानता है कि संसार केवल उसकी इच्छाओं, महत्वाकांक्षाओं और आत्म-संतुष्टि के लिए बना है, और अपने स्वार्थ के लिए समाज के नियमों या किसी भी प्राणी के जीवन को कुचलने में संकोच नहीं करता, वह मृत्यु के बाद राक्षस योनि प्राप्त करता है। धार्मिक अनुष्ठानों, यज्ञों और पूजा-पाठ को नष्ट करना, ऋषियों और सज्जनों की हत्या करना, वैदिक नियमों का उपहास करना, घोर क्रूरता, छल-कपट से दूसरों का सर्वस्व हरना, पर-स्त्री अपहरण या पर-स्त्री गमन, दूसरों को पीड़ा देकर सुख पाना, तथा ईश्वर के प्रति द्वेष और स्वयं ईश्वर बनने की महत्वाकांक्षा राक्षस योनि के कारण बताए गए हैं।
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