शिव रूपनटराज रूप में शिव की पूजा कब और कैसे करनी चाहिए?प्रदोष काल सर्वोत्तम (शिव तांडव का समय)। चिदंबरम = नटराज का मुख्य केंद्र (पंचभूत आकाश तत्त्व)। 'ॐ नटराजाय नमः' 108 बार + शिव तांडव स्तोत्र। नटराज = अज्ञान पर विजय, सृष्टि-संहार चक्र। कलाकारों/नर्तकों के लिए विशेष।#नटराज#तांडव#चिदंबरम
तीर्थ स्थलपंचभूत स्थल मंदिर कौन से?पृथ्वी=कांचीपुरम, जल=तिरुवनैक्कावल(त्रिची), अग्नि=तिरुवण्णामलई, वायु=श्रीकालहस्ती, आकाश=चिदंबरम। 5 शिव मंदिर = 5 तत्व = शरीर शुद्धि। दक्षिण तीर्थ।#पंचभूत#5 तत्व
विश्वव्यापक शिवशिव पंचभूतों में कैसे हैं?शिव को जल, वायु, तेज, पृथ्वी और अंतरिक्ष में व्याप्त रूप से नमस्कार किया गया है।#पंचभूत#शिव#जल
शिव तत्त्वलिंग तत्त्व क्या है?लिंग तत्त्व प्रधान प्रकृति है, जो शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध आदि से संयुक्त बताई गई है।#लिंग तत्त्व#प्रकृति#प्रधान
लोकतन्मात्रा क्या होती है?तन्मात्रा तत्वों के सूक्ष्म गुण हैं, जैसे शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गंध।#तन्मात्रा#पंचभूत#सृष्टि
भूतनाथ मंत्र साधनाभगवान शिव को 'भूतनाथ' क्यों कहते हैं?शिव पंच महाभूतों (तत्वों) के स्वामी और प्रेत-गणों के अधिपति होने के कारण भूतनाथ कहलाते हैं।#भूतनाथ#शिव#पंचभूत
शास्त्र ज्ञानउपनिषद में ब्रह्मांड का वर्णन कैसे है?उपनिषदों में ब्रह्मांड ब्रह्म से उत्पन्न है। छान्दोग्य (6/2/1) — आरंभ में एकमात्र 'सत्' था, उससे तेज-जल-पृथ्वी की सृष्टि हुई। तैत्तिरीय (2/1-6) में ब्रह्म → आकाश → वायु → अग्नि → जल → पृथ्वी का सृष्टि-क्रम है। 'सर्वं खल्विदं ब्रह्म' — यह सम्पूर्ण जगत ब्रह्म ही है।#ब्रह्मांड#उपनिषद#सृष्टि
मंत्र जप विधिमंत्र जप में भूत शुद्धि का क्या अर्थ है?पंचभूत (पृथ्वी/जल/अग्नि/वायु/आकाश) शुद्धि। बीज: लं/वं/रं/यं/हं — 5 चक्रों पर। भौतिक→दिव्य शरीर। 'मैं आत्मा हूं' भावना। तांत्रिक में अनिवार्य।#भूत शुद्धि#अर्थ#पंचभूत
तंत्र साधनातंत्र शास्त्र में भूत शुद्धि का क्या विधान है?पंचभूत शुद्धि: लं/वं/रं/यं/हं — 5 चक्रों पर बीज जप। अग्नि(रं)→शरीर भस्म→पुनर्निर्माण (कल्पना)। 'सोऽहम्' = आत्मा भावना। तांत्रिक जप/यंत्र पहले = अनिवार्य। सरल: 5×'ॐ'।#भूत शुद्धि#विधान#पंचभूत
तीर्थ स्थलचिदंबरम नटराज मंदिर और आकाश तत्व संबंध?चिदंबरम तमिलनाडु — पंचभूत आकाश तत्व। चिदम्बर रहस्य = खाली स्थान (शून्य) = निराकार शिव = आकाश। नटराज = सृष्टि नृत्य (CERN)। 5 पंचभूत: पृथ्वी-कांची, जल-तिरुवनैक्कावल, अग्नि-तिरुवण्णामलई, वायु-कालहस्ती, आकाश-चिदंबरम।#चिदंबरम#नटराज#आकाश