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विस्तृत उत्तर
इस कथा में पंचभूत अव्यक्त अवस्था से धीरे-धीरे जाग्रत होते हैं। आदिनाद से शब्द तन्मात्रा और आकाश की संभावना बनी, फिर स्पर्श, रूप, रस और गंध की सूक्ष्म अवस्थाएँ आगे विकसित हुईं। इन्हीं सूक्ष्म गुणों से आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी के स्थूल रूप बने। इसलिए पंचभूतों की रचना ध्वनि, स्पंदन और प्राण-गति से जुड़ी बताई गई है।
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