विस्तृत उत्तर
नहीं। गरुड़ पुराण का यह सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है कि मृत्यु के बाद सभी जीवात्माएँ एक समान अनुभव नहीं करतीं। उनका अनुभव उनके जीवनकाल के कर्मों, भक्ति और स्वभाव पर पूर्णतः निर्भर करता है।
गरुड़ पुराण में यह बताया गया है कि जिस व्यक्ति ने पुण्य कर्म किए हों, उसे मृत्यु के समय देवदूत दिव्य विमान लेकर आते हैं — कोई भय नहीं, कोई कष्ट नहीं। यमदूत भी उसे सुखदायक रूप में दिखते हैं। यमलोक में सम्मानजनक द्वार से प्रवेश होता है।
दूसरी ओर पापी जीव को यमदूत भयावह रूप में दिखते हैं, मृत्यु के समय अत्यधिक कष्ट होता है, यममार्ग पर यातनाएँ होती हैं और यमलोक में दंड मिलता है।
योगी, ऋषि और मोक्ष-प्राप्त आत्माओं का अनुभव इन दोनों से भिन्न होता है — वे सीधे परमधाम या मोक्ष को प्राप्त होते हैं और उनके लिए यमलोक की यात्रा ही नहीं होती।
इस प्रकार गरुड़ पुराण का स्पष्ट संदेश है — मृत्यु के बाद का अनुभव इस जन्म में किए गए कर्मों का प्रतिफल है। जीवन में किए गए अच्छे कर्म मृत्यु के बाद की यात्रा को सुगम और सुखद बनाते हैं।





