📖
विस्तृत उत्तर
एकसूत्रीय जल में जीव अपने स्थूल शरीरों के साथ नहीं रहते। महाप्रलय में शरीर, नाम, रूप और लोक सब लीन हो जाते हैं, लेकिन जीव के कर्म-संस्कार सूक्ष्म रूप में सुरक्षित रहते हैं। वे परम चेतना की अव्यक्त अवस्था में विश्राम करते हैं। नई सृष्टि शुरू होने पर वही जीव अपने कर्मों के अनुसार फिर अलग-अलग रूपों में प्रकट होते हैं।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?


