विस्तृत उत्तर
कहा गया है कि कुबुद्धि जीव बहुत-सी तर्कयुक्तियों से भगवान के नाना नाम, रूप और लीला को यथार्थ रूप से नहीं पहचान सकता। जैसे अनजान मनुष्य जादूगर या नट की करामात को नहीं समझ पाता, वैसे ही केवल बाहरी बुद्धि से भगवान के संकल्प और वेदवाणी से प्रकट रूपों का रहस्य नहीं जाना जा सकता। भगवान चक्रपाणि हैं, उनका शौर्य और पराक्रम अनंत है; वे सारे जगत के निर्माता होते हुए भी उससे सर्वथा परे हैं। उनके स्वरूप और लीला के रहस्य को वही जान सकता है जो निरंतर निष्कपट भाव से उनके चरणकमलों की सुगंध का सेवन करता है, यानी सेवाभाव से उनके चरणों का चिंतन करता रहता है।
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