विस्तृत उत्तर
वेदव्यास के जन्म का संक्षिप्त वर्णन मिलता है। सूतजी कहते हैं कि वर्तमान चतुर्युगी के तीसरे युग, द्वापर में महर्षि पराशर से वसुकन्या सत्यवती के गर्भ से भगवान के कलावतार योगीराज व्यासजी का जन्म हुआ। यहाँ व्यासजी के जन्म की विस्तृत कथा नहीं दी गई, लेकिन उनके दिव्य स्वरूप और वंश का संकेत स्पष्ट है। उन्हें केवल विद्वान लेखक नहीं, बल्कि भगवान का कलावतार और योगीराज कहा गया है। आगे उसी भाग में उनके कार्य बताए गए हैं: उन्होंने समय की स्थिति देखकर वेदों को चार भागों में विभाजित किया, इतिहास और पुराण को व्यवस्थित किया, महाभारत रचा और फिर भी भगवान-प्राप्ति कराने वाले धर्म के पर्याप्त निरूपण की कमी अनुभव की।
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