विस्तृत उत्तर
शुकदेवजी को व्यासजी का पुत्र और महान योगी बताया गया है। शौनकजी कहते हैं कि वे समदर्शी, भेदभावरहित, संसार-निद्रा से जागे हुए और निरंतर एकमात्र परमात्मा में स्थित रहते हैं। वे छिपे रहने के कारण मूढ़ जैसे प्रतीत होते हैं। एक प्रसंग भी दिया गया है: जब शुकदेवजी संन्यास के लिए वन की ओर जा रहे थे, तब व्यासजी उनका पीछा कर रहे थे। जल में स्नान करती स्त्रियों ने नग्न शुकदेवजी को देखकर वस्त्र नहीं धारण किए, पर वस्त्र पहने व्यासजी को देखकर लज्जा से कपड़े पहन लिए। उन्होंने कारण बताया कि व्यासजी की दृष्टि में स्त्री-पुरुष भेद अभी है, पर शुकदेवजी की शुद्ध दृष्टि में वह भेद नहीं है। इसलिए वे अत्यंत वैराग्यवान और आत्मस्थित मुनि हैं।
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