विस्तृत उत्तर
भगवान का अठारहवाँ अवतार राम के रूप में बताया गया है। देवताओं का कार्य संपन्न करने की इच्छा से भगवान ने राजा के रूप में रामावतार ग्रहण किया। पाठ में रामावतार की लीलाओं में सेतुबन्धन और रावणवध आदि वीरतापूर्ण कार्यों का उल्लेख है। यहाँ रामकथा का विस्तार नहीं दिया गया, पर अवतार का उद्देश्य और प्रमुख कार्य स्पष्ट कर दिए गए हैं। राम अवतार देवकार्य की सिद्धि, वीरता, सेतु निर्माण और रावण-वध से जुड़ा हुआ है। भगवान इस रूप में राजधर्म और दुष्ट-विनाश की दिशा में कार्य करते हैं, पर उत्तर में केवल वही बातें रखनी चाहिए जो इस श्लोक में आई हैं।
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