विस्तृत उत्तर
नारदजी व्यासजी से कहते हैं कि आपने भगवान के निर्मल यश का पर्याप्त गान नहीं किया। जिस ज्ञान या शास्त्र से भगवान संतुष्ट न हों, वह अधूरा है। धर्म, अर्थ आदि पुरुषार्थों का वर्णन होने पर भी यदि वासुदेव की महिमा पूरी तरह न कही जाए, तो उससे व्यासजी का हृदय संतुष्ट नहीं हो सकता। नारदजी इसलिए उनसे अचिंत्य शक्ति वाले भगवान की लीलाओं का स्मरण और वर्णन करने को कहते हैं, ताकि जीव बंधन से मुक्त हों। अंत में वे स्पष्ट कहते हैं कि भगवान की प्रेममयी लीला का वर्णन करने से बड़े-बड़े ज्ञानी पुरुषों की जिज्ञासा भी शांत होती है और दुखों से पीड़ित लोगों को शांति मिलती है। इसलिए भागवत का उद्देश्य भगवान के यश, नाम, लीला और भक्ति को केंद्र में रखकर जीवों का कल्याण करना है।
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