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श्रीमद्भागवत प्रश्नोत्तर (पेज 5) — 429 प्रश्न

श्रीमद्भागवत से जुड़े 429 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 429 प्रश्न

भागवत पुराण मनुष्य का कल्याण कैसे करती है?

यह परमात्मा का निरूपण करती है, तीन तापों का नाश बताती है और कलियुग के जीवों के लिये शास्त्रों का सार माँगा गया है।

कल्याणभागवत पुराणकलियुग
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श्रीमद्भागवत को परम धर्म क्यों कहा गया है?

क्योंकि इसमें मोक्ष तक की फल-कामना से रहित, निष्कपट और सत्पुरुषों के योग्य परम धर्म का निरूपण है।

परम धर्मश्रीमद्भागवतनिष्कपट धर्म
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भागवत कथा सुनाने वाले को क्या फल मिलता है?

जो नियमपूर्वक भक्ति से सुनता है और जो शुद्ध वैष्णवों के सामने सुनाता है, दोनों यथार्थ फल पाते हैं; उनके लिये कुछ असाध्य नहीं।

कथा सुनानावक्ता फलवैकुंठ
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आधे क्षण की भागवत कथा सुनने का फल क्या है?

असार संसार में कल्याण के लिये आधे क्षण भी शुककथा का पान करने को कहा गया है; कान में प्रवेश करते ही मुक्ति की बात कही गई है।

आधा क्षणभागवत कथामुक्ति
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भागवत वैष्णवों का धन क्यों है?

शुकदेवजी भागवत को पुराणों का तिलक और वैष्णवों का धन कहते हैं, क्योंकि इसमें परमहंसों का निर्मल ज्ञान और भक्ति-ज्ञान-वैराग्य सहित मुक्ति मार्ग है।

वैष्णवभागवतधन
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भागवत सुनने से ज्ञान वैराग्य भक्ति कैसे बढ़ते हैं?

विधिपूर्वक सप्ताह श्रवण के अंत में ज्ञान, वैराग्य और भक्ति को बड़ी पुष्टि मिली और वे तरुण होकर सबको आकर्षित करने लगे।

ज्ञानवैराग्यभक्ति
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भागवत श्रवण को सबसे बड़ा धर्म क्यों कहा गया?

नारदजी कहते हैं कि वे भागवत श्रवण को सब धर्मों से श्रेष्ठ मानते हैं, क्योंकि इससे वैकुंठ-विहारी कृष्ण की प्राप्ति होती है।

भागवत श्रवणश्रेष्ठ धर्मकृष्ण प्राप्ति
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भागवत पुस्तक दान करने का फल क्या है?

सामर्थ्य हो तो सोने के सिंहासन पर भागवत पुस्तक रखकर आचार्य को दान करने से जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति बताई गई है।

भागवत पुस्तक दानआचार्यजन्म-मरण मुक्ति
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भागवत सप्ताह में बारह ब्राह्मणों को भोजन क्यों कराएं?

समापन पर बारह ब्राह्मणों को खीर, मधु आदि उत्तम पदार्थ खिलाकर व्रत की पूर्ति और दान का विधान बताया गया है।

ब्राह्मण भोजनबारह ब्राह्मणव्रतपूर्ति
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विष्णु सहस्रनाम पाठ क्यों करें?

विधि में हुई कमी-अधिकता और अनेक त्रुटियों की शांति के लिये विष्णुसहस्रनाम पाठ बताया गया है; इससे कर्म सफल होते हैं।

विष्णु सहस्रनामदोष शांतिभागवत सप्ताह
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हवन न कर सकें तो क्या करें?

हवन न कर सकें तो उसका फल पाने के लिये हवन सामग्री ब्राह्मण को दें और दोष-शांति के लिये विष्णुसहस्रनाम पढ़ें।

हवन विकल्पहवन सामग्री दानविष्णु सहस्रनाम
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भागवत सप्ताह के बाद दान किसे दें?

समाप्ति पर ब्राह्मणों और याचकों को धन-अन्न दें; सामर्थ्य हो तो हवन सामग्री, गौ-सुवर्ण और भागवत पुस्तक आचार्य को दें।

दानभागवत सप्ताहब्राह्मण
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कथा पूरी होने पर क्या करना चाहिए?

कथा पूरी होने पर भागवत पुस्तक और वक्ता की भक्ति से पूजा, प्रसाद-तुलसी वितरण, कीर्तन, जयघोष, शंखध्वनि और दान करना चाहिए।

कथा समाप्तिपूजाप्रसाद
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क्या भागवत सप्ताह में उद्यापन जरूरी है?

विशेष फल की इच्छा वालों के लिये उद्यापन है, पर निष्काम अकिंचन भक्तों के लिये उद्यापन का आग्रह नहीं बताया गया।

उद्यापनभागवत सप्ताहनिष्काम भक्ति
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भागवत सप्ताह का उद्यापन कैसे करें?

उद्यापन में पुस्तक-वक्ता पूजा, प्रसाद-तुलसी, कीर्तन, जय-शंखध्वनि, दान, गीता पाठ या हवन, ब्राह्मण भोजन और पुस्तक दान बताए गए हैं।

उद्यापनभागवत सप्ताहदान
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संतान सुख के लिए भागवत कथा क्यों सुनते हैं?

जिन स्त्रियों को संतान-संबंधी दुख हो, उन्हें प्रयत्नपूर्वक कथा सुनने को कहा गया है; विधिपूर्वक श्रवण से उत्तम फल मिलता है।

संतान सुखभागवत कथास्त्री
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भागवत कथा सुनते समय किनसे बात नहीं करनी चाहिए?

नियम से कथा सुनने वाले को रजस्वला, अंत्यज, म्लेच्छ, पतित, गायत्रीहीन, ब्राह्मणद्वेषी और वेदबाह्य लोगों से बातचीत न करने को कहा गया है।

बातचीतश्रवण नियमभागवत कथा
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भागवत सप्ताह में जमीन पर सोना क्यों बताया गया?

नियम से कथा सुनने वाले के लिये ब्रह्मचर्य, भूमि पर शयन और संयमित भोजन का विधान श्रोता के व्रत और विनय का भाग है।

भूमि शयनभागवत सप्ताहनियम
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भागवत सप्ताह में ब्रह्मचर्य क्यों जरूरी है?

नियमपूर्वक कथा सुनने वाले के लिये ब्रह्मचर्य, भूमि पर शयन और संयमित भोजन को श्रवण-व्रत का अंग बताया गया है।

ब्रह्मचर्यभागवत सप्ताहनियम
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श्रीमद्भागवत — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर श्रीमद्भागवत श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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श्रीमद्भागवत को गहराई से समझने का तरीका

श्रीमद्भागवत के पेज 5 प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

429 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।