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श्रीमद्भागवत प्रश्नोत्तर (पेज 7) — 429 प्रश्न

श्रीमद्भागवत से जुड़े 429 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 429 प्रश्न

सात दिन भागवत सुनने का फल क्या है?

सात दिन भागवत सुनने से धुंधुकारी प्रेत योनि से मुक्त हुआ, और पुनः श्रवण से श्रोताओं को हरिधाम तथा गोलोक की प्राप्ति हुई।

सात दिन भागवतभागवत सप्ताहमुक्ति
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जब श्राद्ध से मुक्ति न मिले तो क्या करें?

धुंधुकारी की कथा में श्राद्ध से मुक्ति न मिलने पर सूर्यदेव ने श्रीमद्भागवत सप्ताह पारायण का उपाय बताया।

श्राद्धमुक्तिभागवत सप्ताह
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क्या श्राद्ध से हर आत्मा मुक्त हो जाती है?

कथा में धुंधुकारी के लिये गया श्राद्ध हुआ, फिर भी मुक्ति नहीं मिली; उसे भागवत सप्ताह से मुक्ति मिली।

श्राद्धगया श्राद्धप्रेत मुक्ति
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पापी व्यक्ति को मृत्यु के बाद क्या कष्ट मिलते हैं?

धुंधुकारी के उदाहरण में पापी व्यक्ति मृत्यु के बाद प्रेत बनकर दिशाओं में भटकता, भूख-प्यास और शीत-घाम सहता है।

पापी व्यक्तिमृत्युप्रेत योनि
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बुरे कर्मों का फल मृत्यु के बाद क्या होता है?

धुंधुकारी के उदाहरण में बुरे कर्मों का फल मृत्यु के बाद प्रेत योनि, भूख-प्यास, भटकाव और असहायता के रूप में आया।

बुरे कर्मकर्मफलमृत्यु
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गया श्राद्ध के बाद भी प्रेत बाधा क्यों रहती है?

कथा में धुंधुकारी के अपने दोष और असंख्य कुकर्म इतने भारी बताए गए हैं कि गया श्राद्ध से भी उसकी मुक्ति नहीं हुई।

गया श्राद्धप्रेत बाधाकर्मफल
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आत्मदेव को कृष्ण की प्राप्ति कैसे हुई?

आत्मदेव ने गोकर्ण के उपदेश से घर छोड़ा, वन में हरि सेवा की और नियमपूर्वक दशम स्कंध का पाठ करके श्रीकृष्ण को प्राप्त किया।

आत्मदेवकृष्ण प्राप्तिदशम स्कंध
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श्रीमद्भागवत — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर श्रीमद्भागवत श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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श्रीमद्भागवत को गहराई से समझने का तरीका

श्रीमद्भागवत के पेज 7 प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

429 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।