विस्तृत उत्तर
धुंधुकारी की प्रेत बाधा गहरी थी। गोकर्ण ने उसके लिये गया श्राद्ध किया, पर वह मुक्त नहीं हुआ। जब धुंधुकारी प्रेत रूप में सामने आया, उसने कहा कि सैकड़ों गया श्राद्ध से भी उसकी मुक्ति नहीं होगी। गोकर्ण ने उपाय खोजा, विद्वानों ने शास्त्र देखे, फिर सूर्यदेव से पूछा गया। सूर्यदेव ने श्रीमद्भागवत सप्ताह को उपाय बताया। गोकर्ण ने कथा आरंभ की और धुंधुकारी बाँस में बैठकर सुनने लगा। सात दिनों में सात गाँठें फटती गईं और कथा पूर्ण होने पर वह प्रेत रूप छोड़कर दिव्य देह में प्रकट हुआ। इस कथा में भागवत सप्ताह प्रेत बाधा का नाश कथा-श्रवण, पाप-क्षय और मुक्ति के माध्यम से करता है।
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