विस्तृत उत्तर
जब धुंधुकारी गया श्राद्ध के बाद भी मुक्त नहीं हुआ, तब गोकर्ण ने उससे पूछा कि अब क्या किया जाए। धुंधुकारी ने कहा कि सैकड़ों गया श्राद्ध से भी मुक्ति नहीं होगी, कोई अन्य उपाय सोचो। गोकर्ण आश्चर्य में पड़े और रात भर विचार करते रहे, पर उपाय न मिला। सुबह लोगों को घटना बताई गई। विद्वान, योगनिष्ठ और वेदज्ञ लोगों ने भी अनेक शास्त्र देखे, पर मुक्ति का साधन नहीं पाया। तब सबने सूर्यदेव की आज्ञा को मानने का विचार किया। गोकर्ण ने सूर्य की गति रोककर प्रार्थना की। सूर्यदेव ने कहा कि श्रीमद्भागवत से मुक्ति होगी, इसलिए सप्ताह पारायण करो। यही उपाय अपनाया गया और मुक्ति हुई।
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