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श्रीमद्भागवत प्रश्नोत्तर (पेज 6) — 429 प्रश्न

श्रीमद्भागवत से जुड़े 429 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 429 प्रश्न

भागवत कथा में फालतू बात क्यों नहीं करनी चाहिए?

कथा में शुद्ध चित्त से ध्यान रखना है; विराम में भी व्यर्थ बात छोड़कर प्रसंगानुसार कीर्तन करना बताया गया है।

व्यर्थ बातकथा श्रवणएकाग्रता
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कथा विराम में कीर्तन क्यों करना चाहिए?

विराम में कीर्तन इसलिए बताया गया है कि कथा का प्रसंग और भगवान के गुण श्रोताओं के मन में बने रहें, व्यर्थ बात न हो।

कीर्तनकथा विरामवैष्णव
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भागवत कथा में दोपहर का विराम क्यों होता है?

दोपहर में दो घड़ी कथा विराम रखकर उसी प्रसंग के अनुसार वैष्णवों को भगवान के गुणों का कीर्तन करना बताया गया है।

दोपहर विरामकीर्तनभागवत कथा
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भागवत सप्ताह में द्वादशाक्षर मंत्र क्यों जपते हैं?

कथा में विघ्न न हो, इस उद्देश्य से पाँच ब्राह्मणों को द्वादशाक्षर मंत्र द्वारा हरि-नाम जप करने के लिये रखा जाता है।

द्वादशाक्षर मंत्रजपविघ्न निवारण
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भागवत सप्ताह में जप कौन करे?

कथा में विघ्न न हो, इसके लिये पाँच ब्राह्मणों का वरण कर उनसे द्वादशाक्षर मंत्र द्वारा हरि-नाम जप कराने को कहा गया है।

जपद्वादशाक्षर मंत्रभागवत सप्ताह
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भागवत कथा में नारियल क्यों रखते हैं?

भागवत पुस्तक के आगे नारियल रखकर नमस्कार और स्तुति करने का विधान है, जहाँ पुस्तक को श्रीकृष्णस्वरूप माना गया है।

नारियलभागवत पूजापुस्तक पूजा
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भागवत पुस्तक की पूजा कैसे करें?

भागवत पुस्तक की धूप-दीप से विधिपूर्वक पूजा कर आगे नारियल रखकर प्रणाम और स्तुति की जाती है; समाप्ति पर भी पुस्तक पूजा है।

भागवत पुस्तकपूजानारियल
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भागवत कथा में भगवान कृष्ण की पूजा कैसे करें?

मंडल में श्रीहरि की स्थापना कर श्रीकृष्ण को लक्ष्य बनाकर मंत्रोच्चार सहित षोडशोपचार पूजा, दक्षिणा और नमस्कार करना बताया गया है।

कृष्ण पूजाषोडशोपचारभागवत कथा
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भागवत कथा शुरू करने से पहले क्या करें?

आरंभ से पहले वक्ता का क्षौर, स्नान, नित्यकर्म, गणेश पूजा, पितृ तर्पण, श्रीहरि स्थापना, श्रीकृष्ण व भागवत पूजा और वक्ता पूजन बताया गया है।

कथा आरंभपूजासंकल्प
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भागवत कथा में श्रोता किस दिशा में बैठें?

श्रोता वक्ता की दिशा के अनुसार पूर्वमुख या उत्तरमुख बैठें; एक मत से वक्ता और श्रोता दोनों पूर्वमुख भी बैठ सकते हैं।

श्रोतादिशाभागवत कथा
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भागवत कथा में वक्ता किस दिशा में बैठे?

वक्ता उत्तरमुख हो तो श्रोता पूर्वमुख बैठें; वक्ता पूर्वमुख हो तो श्रोता उत्तरमुख बैठें, या दोनों पूर्वमुख भी बैठ सकते हैं।

वक्ता दिशाआसनभागवत कथा
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भागवत कथा में कैसे वक्ता से बचना चाहिए?

जो अनेक धर्मों के भ्रम में पड़े हों, स्त्री-लोलुप हों या पाखंड का प्रचार करें, ऐसे पंडित भी भागवत वाचन के लिये अयोग्य बताए गए हैं।

वक्ता चयनपाखंडभागवत कथा
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भागवत कथा का वक्ता किसे बनाना चाहिए?

भागवत कथा का वक्ता वैष्णव ब्राह्मण, वेद-शास्त्र में पारंगत, दृष्टांत-कुशल, धीर, विवेकी और निःस्पृह होना चाहिए।

वक्ताभागवत कथावैष्णव ब्राह्मण
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भागवत कथा में किन लोगों को बुलाना चाहिए?

कथा में परिवार सहित जनसमुदाय, स्त्रियाँ, शूद्र, हरिकथा से दूर लोग, विरक्त वैष्णव और कीर्तन-प्रेमियों को बुलाने की बात कही गई है।

निमंत्रणभागवत कथावैष्णव
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भागवत कथा की तैयारी कब शुरू करें?

तैयारी मुहूर्त और धन-व्यवस्था से शुरू होती है; बिछाने की सामग्री पाँच दिन पहले जुटाने और वक्ता को एक दिन पहले क्षौर कराने को कहा गया है।

कथा तैयारीभागवत सप्ताहमंडप
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भागवत सप्ताह के लिए मुहूर्त कैसे देखें?

मुहूर्त के लिये ज्योतिषी से पूछना, शुभ महीनों को चुनना और भद्रा-व्यतीपात जैसे कुयोग छोड़ना बताया गया है।

मुहूर्तभागवत सप्ताहज्योतिष
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श्रावण मास में भागवत कथा का फल क्या है?

श्रावण मास में गोकर्ण ने फिर सप्ताह कथा कही; उसके बाद भगवान विमानों सहित प्रकट हुए और श्रोताओं को दिव्य गति मिली।

श्रावण मासभागवत कथासप्ताह
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भागवत कथा सुनने से भगवान कैसे प्रसन्न होते हैं?

कथा श्रवण से भगवान कृष्ण प्रसन्न होकर प्रकट हुए, शंख बजाया, गोकर्ण को गले लगाया और श्रोताओं को दिव्य गति दी।

भगवान कृष्णभागवत कथाश्रवण
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श्रीमद्भागवत — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर श्रीमद्भागवत श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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श्रीमद्भागवत को गहराई से समझने का तरीका

श्रीमद्भागवत के पेज 6 प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

429 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।