विस्तृत उत्तर
भागवत कथा के वक्ता की पूजा इसलिए की जाती है कि वह कथा के माध्यम से अज्ञान दूर करने वाला माना गया है। भागवत पुस्तक की पूजा के बाद वक्ता की पूजा करने का निर्देश है। उसे सुंदर वस्त्र और आभूषणों से अलंकृत कर पूजना चाहिए। फिर स्तुति की जाती है: हे शुकस्वरूप भगवन्, आप समझाने की कला में कुशल और सब शास्त्रों में पारंगत हैं; कृपया इस कथा को प्रकाशित करके मेरा अज्ञान दूर कीजिए। सप्ताह समाप्त होने पर भी श्रोता को पुस्तक और वक्ता की अत्यंत भक्ति से पूजा करनी चाहिए। इससे वक्ता का स्थान केवल बोलने वाले व्यक्ति का नहीं, बल्कि भागवत-प्रकाशक गुरु-सदृश मार्गदर्शक का है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





