विस्तृत उत्तर
भागवत सप्ताह की पूरी विधि में पहले ज्योतिषी से मुहूर्त पूछना और विवाह की तरह धन की व्यवस्था करना बताया गया है। कथा के लिये शुभ महीने चुने जाते हैं, उत्साही सहायकों को साथ लिया जाता है और देश-देश में सूचना भेजी जाती है। तीर्थ, वन या घर में विस्तृत स्थान बनाकर मंडप सजाया जाता है, वक्ता और श्रोताओं के आसन लगाए जाते हैं, योग्य वैष्णव ब्राह्मण वक्ता बनाया जाता है और संशय दूर करने के लिये सहायक विद्वान भी रखा जाता है। आरंभ से पहले शौच-स्नान, गणेश पूजा, पितृ तर्पण, श्रीहरि की स्थापना, श्रीकृष्ण और भागवत पुस्तक की पूजा, वक्ता पूजन, संकल्प और जप का विधान है। फिर सात दिन नियमपूर्वक श्रवण, कीर्तन, आहार-विहार संयम और अंत में उद्यापन, दान, हवन या वैकल्पिक पाठ करके सप्ताह पूर्ण किया जाता है।
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