विस्तृत उत्तर
भागवत कथा के लिये केवल सीमित मंडली को नहीं, बल्कि व्यापक निमंत्रण देने की बात कही गई है। देश-देशांतर में सूचना भेजनी चाहिए कि यहाँ कथा होगी और सब लोग परिवार सहित आएँ। जिन स्त्रियों और शूद्र आदि लोगों का भगवान की कथा और संकीर्तन से संपर्क दूर हो गया है, उन्हें भी सूचना मिले, ऐसा प्रबंध करना चाहिए। देश-देश में जो विरक्त वैष्णव और हरिकीर्तन के प्रेमी हैं, उन्हें निमंत्रण पत्र अवश्य भेजने का निर्देश है। निमंत्रण विनयपूर्वक होना चाहिए और आने वालों के लिये रहने का स्थान भी तैयार करना चाहिए। कथा को सत्पुरुषों का दुर्लभ सात दिन का समागम और भागवत अमृत का पान कहा गया है।
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