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श्रीमद्भागवत प्रश्नोत्तर (पेज 4) — 429 प्रश्न

श्रीमद्भागवत से जुड़े 429 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 429 प्रश्न

कपिल भगवान ने सांख्य ज्ञान किसे दिया?

कपिल अवतार में भगवान ने समय से लुप्त हुए तत्त्व-निर्णायक सांख्य शास्त्र का उपदेश आसुरि नामक ब्राह्मण को दिया।

कपिल भगवानसांख्य ज्ञानआसुरि
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भगवान विष्णु के अवतारों की सूची क्या है?

पुरुष, कुमार, वराह, नारद, नर-नारायण, कपिल, दत्तात्रेय, यज्ञ, ऋषभ, पृथु, मत्स्य, कूर्म, धन्वंतरि, मोहिनी, नरसिंह, वामन, परशुराम, व्यास, राम, बलराम-कृष्ण, बुद्ध और कल्कि का वर्णन है।

विष्णु अवतारअवतार सूचीभागवत पुराण
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भगवान सबमें एक होकर भी अलग-अलग कैसे दिखते हैं?

भगवान एक हैं, पर जैसे एक अग्नि अलग-अलग लकड़ियों में अनेक-सी दिखती है, वैसे ही वे अनेक जीवों में अलग-अलग से जान पड़ते हैं।

भगवानजीवसृष्टि
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बुरी वासनाएँ कैसे मिटती हैं?

भगवान की कथा सुनने वालों के हृदय में कृष्ण स्थित होकर अशुभ वासनाएँ दूर करते हैं; निरंतर भागवत सेवा से वे नष्ट होती हैं।

बुरी वासनाएँकृष्ण कथाभागवत सेवा
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संतों की सेवा से भक्ति कैसे आती है?

पवित्र तीर्थों के सेवन से महात्माओं की सेवा, फिर श्रवण की इच्छा, श्रद्धा और अंत में भगवत कथा में रुचि उत्पन्न होती है।

संत सेवाभक्तिवासुदेव कथा
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भगवान को प्रसन्न कैसे करें?

अपने धर्म की पूर्ण सिद्धि भगवान को प्रसन्न करने में है; इसलिए एकाग्र मन से उनका श्रवण, कीर्तन, ध्यान और पूजन करना चाहिए।

भगवान को प्रसन्नश्रवणकीर्तन
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मनुष्य जीवन का उद्देश्य क्या है?

मनुष्य जीवन का उद्देश्य तत्त्व-जिज्ञासा बताया गया है; केवल कर्म, भोग या स्वर्ग-प्राप्ति इसका अंतिम फल नहीं है।

मनुष्य जीवनजीवन उद्देश्यतत्त्व जिज्ञासा
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कलियुग से पार पाने में हरि कथा कैसे मदद करती है?

ऋषि कहते हैं कि कलियुग अंतःकरण की पवित्रता और शक्ति को नष्ट करता है; उससे पार जाने वालों के लिये सूतजी कर्णधार जैसे मिले हैं।

कलियुगहरि कथासूतजी
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कृष्ण मनुष्य जैसे दिखकर भी भगवान कैसे थे?

कृष्ण लोगों के सामने मनुष्य जैसे आचरण करते थे, पर बलराम के साथ उन्होंने ऐसी लीलाएँ और पराक्रम किए जो मनुष्य नहीं कर सकते।

कृष्णभगवानमानव लीला
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भगवान के चरणों की शरण क्यों श्रेष्ठ है?

परम शांत मुनि भगवान के चरणों की शरण में रहते हैं; उनके स्पर्श से जीव तुरंत पवित्र होता है, गंगा से पवित्रता समय लेकर मिलती है।

भगवान चरणशरणपवित्रता
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भगवान कृष्ण देवकी और वसुदेव के यहाँ क्यों आए?

ऋषि सूतजी से कृष्ण के देवकी-वसुदेव से जन्म का प्रयोजन पूछते हैं और कहते हैं कि भगवान का अवतार जीवों के कल्याण के लिये होता है।

कृष्ण अवतारदेवकीवसुदेव
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कलियुग में शास्त्रों का सार क्यों जरूरी है?

क्योंकि लोग अल्पायु और बाधाग्रस्त हैं, शास्त्र बहुत हैं और उनमें अनेक कर्मों का वर्णन है; उनका एक अंश सुनना भी कठिन है।

कलियुगशास्त्र सारकल्याण
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कलियुग में मनुष्य की हालत कैसी बताई गई है?

कलियुग में मनुष्य अल्पायु, साधना में अरुचि वाला, आलसी, मंदबुद्धि, मंदभाग्य और अनेक बाधाओं से घिरा बताया गया है।

कलियुगमनुष्यअल्पायु
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सूतजी को पुराणों का ज्ञाता क्यों माना गया?

क्योंकि उन्होंने इतिहास, पुराण और धर्मशास्त्रों का अध्ययन और व्याख्या की थी तथा व्यासादि मुनियों के ज्ञान को जानते थे।

सूतजीपुराणधर्मशास्त्र
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श्रीमद्भागवत — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर श्रीमद्भागवत श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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श्रीमद्भागवत को गहराई से समझने का तरीका

श्रीमद्भागवत के पेज 4 प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

429 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।