विस्तृत उत्तर
भगवान का आठवाँ अवतार ऋषभदेव के रूप में बताया गया है। वे राजा नाभि की पत्नी मेरुदेवी के गर्भ से प्रकट हुए। इस अवतार का विशेष कार्य यह बताया गया कि उन्होंने परमहंसों का मार्ग दिखाया। हिंदी व्याख्या में यह मार्ग सभी आश्रमों के लिए वंदनीय कहा गया है। यहाँ ऋषभदेव के उपदेशों का विस्तृत विवेचन नहीं है, पर उनका महत्व स्पष्ट है: वे मनुष्य को उच्चतम आत्मिक जीवन की ओर ले जाने वाले परमहंस मार्ग के प्रदर्शक हैं। ऋषभदेव अवतार केवल राजवंश की कथा नहीं, बल्कि वैराग्य, आत्मसंयम और परमहंस-धर्म की दिशा दिखाने वाला भगवान का प्राकट्य है।
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