विस्तृत उत्तर
भक्ति और भगवत कथा की रुचि आने का क्रम बताया गया है। पवित्र तीर्थों का सेवन करने से महात्माओं की सेवा प्राप्त होती है। महात्माओं की सेवा के बाद भगवान की कथा सुनने की इच्छा जागती है। उस श्रवण-इच्छा के बाद श्रद्धा आती है और फिर भगवत कथा में रुचि उत्पन्न होती है। यह क्रम बताता है कि भक्ति अचानक केवल भावना से नहीं आती; उसका संबंध सत्संग, सेवा, श्रवण और श्रद्धा से है। महात्मा सेवा मन को ऐसे वातावरण में ले जाती है जहाँ भगवान की कथा की ओर आकर्षण पैदा होता है। जब मन कथा सुनना चाहता है और श्रद्धा दृढ़ होती है, तब वासुदेव कथा में वास्तविक प्रेम और रुचि विकसित होती है।
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