विस्तृत उत्तर
भगवान का पाँचवाँ अवतार कपिल के रूप में बताया गया है। उन्हें सिद्धों के स्वामी कहा गया है। पाठ कहता है कि तत्त्वों का निर्णय करने वाला सांख्य शास्त्र समय के फेर से लुप्त हो गया था। कपिल भगवान ने उसी सांख्य ज्ञान का उपदेश आसुरि नामक ब्राह्मण को दिया। यहाँ सांख्य को केवल गणना या दर्शन की सूखी चर्चा नहीं, बल्कि तत्त्वों का निर्णय कराने वाला ज्ञान बताया गया है। कपिल भगवान की विस्तृत शिक्षा नहीं दी गई, पर उनका उद्देश्य स्पष्ट है: भूले हुए तत्त्वज्ञान को पुनः प्रकट करना और योग्य शिष्य आसुरि को सांख्य का उपदेश देना।
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