विस्तृत उत्तर
कृष्ण के मनुष्य जैसे दिखने और फिर भी भगवान होने की बात सीधे कही गई है। पाठ कहता है कि भगवान श्रीकृष्ण अपने को छिपाए हुए थे और लोगों के सामने ऐसी चेष्टा करते थे मानो वे कोई मनुष्य ही हों। परंतु उन्होंने बलरामजी के साथ ऐसी लीलाएँ और ऐसा पराक्रम प्रकट किया, जो मनुष्य नहीं कर सकते। यहाँ विशेष लीलाओं की सूची नहीं दी गई, पर निष्कर्ष स्पष्ट रखा गया है: उनका बाहरी व्यवहार मानवीय दिखाई देता था, लेकिन उनके कर्म और पराक्रम मानवीय सीमा से परे थे। इसलिए कृष्ण की मानव-लीला उनके भगवानत्व को छिपाती नहीं, बल्कि उनके अद्भुत कर्मों से उसे प्रकट करती है।
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