विस्तृत उत्तर
मनुष्य जीवन का उद्देश्य तत्त्व-जिज्ञासा बताया गया है। भोग-विलास का प्रयोजन इंद्रिय-तृप्ति नहीं, बल्कि जीवन-निर्वाह मात्र है। जीवन का फल तत्त्व के विषय में जिज्ञासा करना है, बहुत कर्म करके स्वर्ग आदि प्राप्त करना नहीं। आगे तत्त्व को अखंड, अद्वितीय, सच्चिदानंद स्वरूप ज्ञान कहा गया है, जिसे कोई ब्रह्म, कोई परमात्मा और कोई भगवान नाम से पुकारता है। इससे स्पष्ट है कि मनुष्य जीवन केवल धन, भोग, कर्म या स्वर्ग की चाह में बिताने के लिये नहीं मिला। इसका उद्देश्य जीवन-निर्वाह से आगे बढ़कर परम सत्य को जानना, भगवान की ओर मुड़ना और उस तत्त्व की खोज करना है जो ब्रह्म, परमात्मा और भगवान के रूप में कहा जाता है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





