विस्तृत उत्तर
भागवत कथा सुनते समय बाहरी और भीतरी दोनों त्याग बताए गए हैं। उत्तम फल पाने के लिये लोक, संपत्ति, धन, घर और पुत्र आदि की चिंता छोड़कर शुद्ध चित्त से कथा में ध्यान रखना चाहिए। नियम से सुनने वाले को ब्रह्मचर्य, भूमि पर शयन और संयमित भोजन रखना है। दाल, मधु, तेल, भारी अन्न, भावदूषित पदार्थ और बासी अन्न छोड़ने को कहा गया है। मन से काम, क्रोध, मद, मान, मत्सर, लोभ, दंभ, मोह और द्वेष को पास नहीं आने देना चाहिए। वेद, वैष्णव, ब्राह्मण, गुरु, गौसेवक, स्त्री, राजा और महापुरुषों की निंदा से बचना है। अनुचित संग और विवाद से दूर रहकर सत्य, शौच, दया, मौन, सरलता, विनय और उदारता अपनानी चाहिए।
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