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श्रीमद्भागवत प्रश्नोत्तर (पेज 8) — 429 प्रश्न

श्रीमद्भागवत से जुड़े 429 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 429 प्रश्न

संन्यासी ने पुत्र मोह छोड़ने को क्यों कहा?

संन्यासी ने कहा कि कर्म की गति प्रबल है और पुत्र से सुख निश्चित नहीं; संतान के कारण सगर और अंग को भी दुख मिला।

पुत्र मोहसंन्यासीआत्मदेव
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आत्मदेव को सात जन्म तक पुत्र क्यों नहीं मिलना था?

संन्यासी ने आत्मदेव का प्रारब्ध देखकर कहा कि सात जन्म तक उन्हें किसी भी प्रकार पुत्र प्राप्त नहीं होगा।

आत्मदेवसात जन्मप्रारब्ध
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सप्ताह यज्ञ किन पापियों को सुधारता है?

पंचमहापाप, छल, क्रूरता, ब्राह्मण-धन से पोषण और मन-वाणी-शरीर से पाप करने वालों तक को सप्ताह यज्ञ से पवित्र कहा गया है।

सप्ताह यज्ञमहापापकलियुग
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सप्ताह यज्ञ से कौन पवित्र होता है?

कहा गया है कि सप्ताह यज्ञ से पापी, दुराचारी, कुटिल, हिंसक और मन-वाणी-शरीर से पाप करने वाले भी पवित्र हो जाते हैं।

भागवत सप्ताहसप्ताह यज्ञपाप नाश
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घर में भागवत कथा कराने से क्या होता है?

स्रोत के अनुसार जिस घर में नित्य भागवत कथा होती है, वह घर तीर्थरूप हो जाता है और वहाँ रहने वालों के पाप नष्ट होते हैं।

घर में भागवत कथातीर्थपाप नाश
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श्रीमद्भागवत — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर श्रीमद्भागवत श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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श्रीमद्भागवत को गहराई से समझने का तरीका

श्रीमद्भागवत के पेज 8 प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

429 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।