विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवतमाहात्म्य में यह प्रसंग आता है कि जब भगवान कृष्ण पृथ्वी छोड़कर अपने धाम जाने लगे, तब उद्धवजी ने चिंता प्रकट की। उन्होंने कहा कि घोर कलिकाल आने वाला है, दुष्ट बढ़ेंगे और उनके संसर्ग से सज्जन भी विचलित हो सकते हैं; तब पृथ्वी किसकी शरण लेगी और भक्त भगवान के वियोग में कैसे रहेंगे। यह सुनकर भगवान ने भक्तों के अवलंबन के लिये उपाय सोचा। सूतजी कहते हैं कि भगवान ने अपना तेज भागवत में रख दिया और उसमें प्रवेश कर गए। इसलिए स्रोत के अनुसार कृष्ण के बाद भक्तों का सहारा श्रीमद्भागवत है, जो हरि की वाङ्मयी मूर्ति है।
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