विस्तृत उत्तर
नारदजी पूछते हैं कि श्रीमद्भागवत कथा कितने दिनों में सुननी चाहिए और उसकी विधि क्या है। सनकादि कहते हैं कि भागवत को सदा सुनना अच्छा है और दिन का कोई कठोर नियम नहीं है। सत्य और ब्रह्मचर्य के साथ निरंतर श्रवण श्रेष्ठ माना गया है, लेकिन कलियुग में ऐसा कर पाना कठिन है। मन को लंबे समय तक वश में रखना, नियम निभाना और किसी पुण्य कार्य में स्थिर रहना कलियुग के लोगों के लिये कठिन बताया गया है। इसी कारण श्रीशुकदेवजी ने सात दिन के श्रवण की विशेष विधि कही। इसलिए स्रोत के अनुसार भागवत कथा का नित्य श्रवण श्रेष्ठ है, पर व्यवहार में भागवत सप्ताह सात दिनों की विधि के रूप में बताया गया है।
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