विस्तृत उत्तर
सनकादि ऋषि नारदजी को श्रीमद्भागवत का माहात्म्य सुनाते हुए कहते हैं कि यह अठारह हजार श्लोकों और बारह स्कंधों वाला ग्रंथ है। उसी वचन में वे बताते हैं कि यह श्रीशुकदेवजी और राजा परीक्षित का संवाद है। वर्णन का आशय यह है कि भागवत कथा को ध्यानपूर्वक सुनना चाहिए, क्योंकि जब तक इस शुकशास्त्र की कथा कान में नहीं पड़ती, तब तक जीव अज्ञानवश संसारचक्र में भटकता रहता है। इसलिए भागवत पुराण का संवाद-स्वरूप शुकदेव और परीक्षित से जुड़ा है, और उसका श्रवण मुक्ति, हरि-स्मरण और भक्ति से संबंधित माना गया है।
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