विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवतमाहात्म्य में नारदजी सनकादि से पूछते हैं कि भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की स्थापना के लिये श्रीमद्भागवत कथा कहाँ की जाए। सनकादि उत्तर देते हैं कि हरिद्वार के पास गंगा तट पर आनंद नाम का घाट है। वहाँ अनेक ऋषि रहते हैं, देवता और सिद्ध भी उसका सेवन करते हैं, और वह स्थान वृक्षों, लताओं, कोमल बालू, एकांत, सुंदरता और सुगंध से युक्त बताया गया है। वहाँ आसपास के परस्पर विरोधी जीवों के मन में भी वैरभाव नहीं रहता। सनकादि कहते हैं कि नारदजी वहाँ बिना विशेष प्रयास के ज्ञानयज्ञ आरंभ करें, क्योंकि उस स्थान पर कथा में अपूर्व रस उत्पन्न होगा।
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