श्राद्ध एवं पितृ कर्महरिद्वार में अस्थि विसर्जन कैसे करेंहर की पैड़ी/गंगा घाट → पंडा से संपर्क → गंगा स्नान → मंत्रोच्चार → तिल-जल तर्पण → अस्थि गंगा में → पिंडदान → दान। पंडा कुल रजिस्टर रखता है। विश्वसनीय पंडा चुनें; पर्यावरण अनुकूल विसर्जन।#हरिद्वार#अस्थि विसर्जन#गंगा
अन्त्येष्टि संस्कारगंगा में अस्थि विसर्जन का क्या विशेष महत्व है?गंगा अस्थि: मोक्षदायिनी (गरुड़ पुराण), विष्णु पादोदक (चरण स्पर्श), पापनाश, पुनर्जन्म मुक्ति। स्थान: हरिद्वार, प्रयागराज, काशी (शिव तारक मंत्र), गंगासागर। 3-10 दिन में। 'ॐ' सहित विसर्जन→तर्पण→पिण्डदान।
तीर्थ स्थलहरिद्वार हर की पौड़ी गंगा आरती का महत्व?हर की पौड़ी = ईश्वर की सीढ़ियाँ, ब्रह्मकुंड, अमृत बूँदें गिरीं, विष्णु पदचिह्न। गंगा आरती = सूर्यास्त, बड़े दीपक, अलौकिक। सप्त पवित्र, कुंभ स्थल, स्नान = मोक्ष।#हरिद्वार#हर की पौड़ी#गंगा आरती