विस्तृत उत्तर
हर की पौड़ी = हरिद्वार का मुख्य घाट — 'हर' (ईश्वर) + 'की' + 'पौड़ी' (सीढ़ियाँ) = ईश्वर की सीढ़ियाँ। यहीं गंगा पहाड़ छोड़कर मैदान में प्रवेश करती है। मान्यता: समुद्र मंथन में अमृत की बूँदें यहीं गिरीं — इसे ब्रह्मकुंड भी कहते। एक पत्थर में विष्णु के पदचिह्न हैं।
गंगा आरती = प्रतिदिन सूर्यास्त पर विश्वप्रसिद्ध आरती। पुजारी बड़े-बड़े दीपकों से गंगा को आरती देते हैं — पानी में दीपों का प्रतिबिंब अलौकिक दृश्य बनाता है। संस्कृत मंत्रोच्चार, घंटानाद, शंखध्वनि — हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन एकत्र।
महत्व: सप्त पवित्र स्थलों में एक, कुंभ मेला यहीं, गंगा स्नान = मोक्ष, पितर तर्पण = सर्वोत्तम। प्रत्येक हिंदू को जीवन में एक बार अवश्य जाना चाहिए।





