विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवतमाहात्म्य में आधा या चौथाई भागवत श्लोक पढ़ने का फल विशेष रूप से बताया गया है। सनकादि कहते हैं कि यदि मनुष्य परम गति चाहता है तो उसे अपने मुख से श्रीमद्भागवत का आधा या चौथाई श्लोक भी नित्य नियमपूर्वक पढ़ना चाहिए। आगे वे बताते हैं कि जो व्यक्ति नित्य भागवत का आधा या चौथाई श्लोक पढ़ता है, वह राजसूय और अश्वमेध यज्ञ का पुण्य प्राप्त करता है। यह बात भागवत के नित्य पाठ की महिमा के प्रसंग में कही गई है। इसलिए स्रोत के अनुसार थोड़ा-सा नियमित भागवत पाठ भी अत्यंत पुण्यदायक माना गया है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





