विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवतमाहात्म्य में भागवत दान का फल विशिष्ट रूप से बताया गया है। सनकादि कहते हैं कि जो व्यक्ति श्रीमद्भागवत को सोने के सिंहासन पर रखकर वैष्णव को दान करता है, वह निश्चय ही भगवान कृष्ण के साथ सायुज्य प्राप्त करता है। यह बात भागवत के पाठ और श्रवण की महिमा के तुरंत बाद आती है। इसलिए स्रोत के अनुसार भागवत दान केवल पुस्तक देने का सामान्य कर्म नहीं, बल्कि वैष्णव को आदरपूर्वक भागवत समर्पित करने का पुण्यकर्म है, जिसका फल कृष्ण-संबंध और सायुज्य के रूप में बताया गया है।
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