विस्तृत उत्तर
भागवत सप्ताह के लिये छह शुभ महीनों का उल्लेख करने के बाद पाठ सावधानी भी देता है। भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, आषाढ़ और श्रावण मोक्षसूचक बताए गए हैं, पर इन महीनों में भी भद्रा, व्यतीपात आदि कुयोगों को सर्वथा त्यागना चाहिए। इसलिए कथा केवल किसी भी शुभ महीने में शुरू कर देना पर्याप्त नहीं है। काल की शुद्धि देखी जाती है और ज्योतिषी से मुहूर्त पूछना भी इसी कारण पहले कहा गया है। इससे विधि का भाव स्पष्ट होता है कि भागवत सप्ताह को मांगलिक, अनुशासित और दोषरहित समय में आरंभ करना चाहिए ताकि श्रवण और आयोजन दोनों व्यवस्थित रूप से फलदायी हों।
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